Category: Hindi
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तीव्र आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य बनाम पर्यावरण, किसानों एवं मजदूरों के हित
(बार्क के त्रैमासिक पत्र ‘बजट समाचार’ के नए अंक से) पिछले वर्ष राज्य (राजस्थान) में तथा इस वर्ष केन्द्र में नई सरकारों का गठन हो चुका है तथा राज्य एवं केन्द्र सरकारें अपनी नीतियां तथा कार्यक्रम अब स्पष्ट कर रही हैं। केन्द्र सरकार तेजी से फैसला लेने पर जोर देते हुए अब तक…
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संसद और विधान सभा में महिलाओं को आरक्षण का सवाल
कीर्ति 9 जून 2014 को माननीय राष्ट्रपति, श्री प्रणव मुखर्जी, ने संयुक्त सदन को संबोधित करते हुए नई सरकार की संसद और विधान सभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की वचनबद्धता दोहराई। सभी दलों की महिला सांसदों ने मेजें थपथपाकर इसका स्वागत किया। पूर्ण बहुमत से आई सरकार की मंशा जाहिर होते ही…
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श्रम कानूनों में बदलाव की तैयारी: सरमायेदारों के अच्छे दिन
जावेद अनीस बीते 20 अगस्त को मध्यप्रदेश के मैहर स्थित रिलायंस सीमेंट फैक्ट्री में रोज की तरह मजदूर काम कर रहे थे। दोपहर करीब दो बजे साइलो के अंदर अचानक सीमेंट वॉल्ब खुल गया,जिससे बड़े पैमाने पर सीमेंट नीचे आ गई। सीमेंट के नीचे बड़ी संख्या में मजदूर दब गए, हादसे में दर्जन भर मजदूर…
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घटते किसान, बढ़ते कृषि मज़दूर
A part of this article published in Daily News, Jaipur नेसार अहमद भारत की जनगणना 2011 के रोजगार संबंधित आंकड़े जारी हो गये हैं। इन आंकड़ों ने पिछले दो दशकों में कृषि तथा किसानों की बदतर हो रही स्थिति को ही उजागर किया है। उदारीकरण एवं वैश्वीकरण के दौर में बढ़ते लागत खर्च, आयात-निर्यात पर…
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जे एन एन यू आर एम और बद्तर होते शहरी ग़रीब
जावेद अनीस [anisjaved@gmail.com] [जवाहरलाल नेहरू अर्बन रिनुयल मिशन (जे एन एन यू आर एम) भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा शहरी विकास का सबसे बड़ा कार्यक्रम है जो भारत के कई शहरों में चलाया जा रहा है I प्रस्तुत आलेख में जावेद अनीस ने भोपाल शहर में इस कार्यक्रम के शहरी ग़रीबों पर होने वाले प्रभावों का…
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ग्रिड नाकाम हुए या हमारी ऊर्जा नीति
कुमार सुंदरम [जनसत्ता 4 अगस्त, 2012: से साभार] अकाल के समय सूखी धरती का फोटो चस्पां कर देना और इतिहास की सबसे बड़ी ग्रिड-नाकामी पर यह लिख देना कि साठ करोड़ लोग अंधेरे में डूब गए, हमारे सरलीकरण-प्रेमी मीडिया का ऐसा शगल है जो इस देश की नीति और व्यवस्था के व्यापक सवालों से…
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भूमि अधिग्रहण एवं ‘सार्वजनिक हित’
♦ नेसार अहमद [From www.mohallalive.com] पिछले वर्षों में देश में भूमि अधिग्रहण का मामला काफी पेचीदा हो गया है। सरकार न केवल बुनियादी ढांचे, सड़कें, बांध तथा सरकारी कंपनियों द्वारा खनन के लिए भूमि अधिग्रहित करती है बल्कि निजी कंपनियों द्वारा खनन, उद्योग तथा रीयल स्टेट, बुनियादी ढांचा विकास आदि के लिए भी जमीन अधिग्रहित…